tag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-25565563975390999382007-06-14T08:26:00.000-07:002007-06-14T09:11:05.666-07:00लिखेङ्गे अबसे हम भिहा, अब से हम भि, लिखेक्ङ्गे अपनि दिल कि बाते, जो, अपने मुह से कभी बोला नही, कही किसिसे खोला नही, हा, खुला पुस्तक बने, जो, पढ सके अपनि दिल से, कोइ सम्झ सके, तो....................बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.com