tag:blogger.com,1999:blog-78451699879756726992008-05-08T02:13:53.532-07:00दिल कि बातेबोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comBlogger14125tag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-15881138751643622542007-12-06T03:26:00.001-08:002007-12-06T03:26:49.480-08:00खोया-खोया चाँदिर्माता : प्रकाश झा निर्देशक : सुधीर मिश्रासंगीत : शांतनु मोइत्राकलाकार : शाइनी आहूजा, सोहा अली खान, सोनिया, रजत कपूर, विनय पाठक, दीपान्निता शर्मा, सुष्मिता मुखर्जी IFM 1950 और 60 के दशक को भारतीय फिल्म उद्योग का स्वर्णिम काल कहा जाता है। उस दौर में कई प्रतिभाशाली कलाकारों ने मिलकर अभिनय, संगीत और निर्देशन के जरिए कई यादगार फिल्मों का निर्माण किया था। 50 से 60 वर्ष पूर्व बनाई गई फिल्में आज बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-52728309967651928922007-10-14T05:39:00.001-07:002007-10-14T05:39:16.612-07:00ANYONE KNOW HIM?Du You know Him? He's Da Blogger For This Site. Well This is Da First time For Showing my Pic Over Here. Plz Make Comment. Thanx:) बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-47365935100545541692007-08-28T02:13:00.000-07:002007-08-28T02:14:04.324-07:00काले तिम्रो याद मा - (नेपाली)आफ्नो हाँसो बन्धक राखी, बिदेश तिर हिन्छु लाग्यो। अलिकता खुशी बचेँ, अरु आसु किन्छु लाग्यो ।
एक्लै भेट्दा फकाएथ्यो, मन् मुटु चिरिवरि आफै लाई हराएर, तिम्रो नाम लिन्छु लाग्यो।
रोय तिमि तिम्रो लागि, रुने मेरो रहर् भाथ्यो। देखाएथ्यौ सपना ले, अब सन्सार किन्छु लाग्यो।
मन तन सुम्पे मैले, तिम्रै निम्ति मरिमेटे। कोसौ पर आहटमा, तिम्रो आभास चिन्छु लाग्यो।
कति तिम्रो याद मा, भन् "काले" तिमि आफै, तिम्रै निम्ति बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-25054401163625494502007-08-28T01:25:00.001-07:002007-08-28T02:18:28.003-07:00यस्तो म (येसा मै ) - ( NEPALI)रमाउछु, खुशी हुन्छु, हासिरन्छु जैलेपनि, खुशी छु म किन यती हास्दिनथे कैलेपनि । छेउकाले आँखा तर्छन्, टाढा का ले फर्किहेर्छन्, उफ्री हिडछु टेक्दिन म ,खुट्टा ले भुई कैले पनि । खै के भा'को राम्रो लाग्छु,आफैलाई हेर्दा आफु, चिट्टिक्कै म भाको हुन्छु, बहिर सबै मैले पनि। नचिनेनि सबै सङ्ग मुस्काउदै हिन्ड्छु म त,हुन त हो माया गर्थे, सबै लाई पैले पनि CREAM घस्छु मुहार मा, टि-सर्ट मा बुट्टा भर्छु, कपालबोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-56504867220387639072007-08-28T01:22:00.001-07:002007-08-28T01:22:40.541-07:00सन्तोष सापकोटा अनि अ-सन्तोष मन -"नेपाली" आज धेरै दिन पछी साथी सन्तोष सापकोटा लाई च्याट मा भेटे । निकै खुशी लाग्यो । मन मा परदेश बस्नु को पिडा पोखिएकै छ । धमिलो छ मन,जती आन्सु ले धोए पनि पखालीदैन । केही सुकेका घाउ बल्झिए केही खुशी का त्यान्द्रा सल्बलिए मन भरि । म नेपाली साथी हरुलाई कमै मात्र भेट्छु, आज उसलाई भेट्दा एक पल्ट फेरी म्याग्दी क्याम्पस म बेलाउती अनि आप खाएको सम्झना रु मल्लियो मन भरि । कछा कोठा मा क्यारेम खेलेको बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-12191771056687741032007-08-26T10:05:00.001-07:002007-08-27T03:42:57.650-07:00कम्बख्त यह जिन्दगी<!--chitthajagat claim code--> <!--chitthajagat claim code--> दुरी लिखा और, कभी मजबुरी लिखा, वो कम्बख्त लेकिन, जिन्दगी पुरी लिखा । अपने गम कि परछाई, सोया नही अभी, वहाँ भि उसकी, दिलकी बहादुरी लिखा । शुक्र है छुट गए, हारने मे से हम, फिर भि जितवादियो से, मिलो कि दुरी लिखा । टुटते कभी जुडते, पहुच गए हम, मुकाम पर आए तो, फिर आधि-हुरी लिखा । हा, याद आई है, उसकी आज हमे, इसलिए तो प्रसशा, बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-60320644837003760072007-08-26T09:53:00.001-07:002007-08-26T09:53:21.997-07:00टेस्ट पोस्ट - चिट्ठा अधिकृत के लिए<!--chitthajagat claim code--> <!--chitthajagat claim code-->कृपया यह पोस्ट इग्नोर किजिए । पहचान-पर्ची: chitthahjagat.in बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-54384546648950170122007-08-26T09:45:00.000-07:002007-08-26T09:47:48.485-07:00टेस्ट पोस्ट - चिट्ठा अधिकृत के लिए<!--chitthajagat claim code-->
<!--chitthajagat claim code-->कृपया यह पोस्ट इग्नोर किजिए ।बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-72335626975716311842007-07-04T09:07:00.000-07:002007-07-05T09:45:55.846-07:00धडकन तुम्हारिकेवल तुम्हारे खातिर्, बदनाम हुए हम्, तनहाईया कि बारात मे गुमनाम हुए हम ।
छु-कर देखा था, कभि धडकन तुम्हारि, दुनिया वालो मे से, गम कि पहचान हुए हम । आशिकी इस क़दर, छा गयी मुझ पर,कि अपनो से भी, अनजान हुये हम । बस ! अब तो , याद बची है तुम्हारी,आये कोई क्योँ यहा, शमशान हुए हम .
बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-42852868214543126762007-07-03T11:02:00.000-07:002007-07-03T11:12:46.408-07:00दे दो ना ........वेवशी दर्द का आलम,
तुम मुझे दे दो अपनी गम,
खामोशिया भी दो,
तनहाईया भी दो,
बेचैनिया भी दो,
................................. दे दो ना ।
भीगी पल्को से चुरा लुंगी नमी,
रहने दूंगी ना कही कोई कमी,
तुम को दामन ना भी दोने दूंगी,
अब कभी ना तुम्हे रोने दूंगी,
उलझते गम कि परछाई ,
देदो तुम अपने तनहाई,
गुमनामिया भी दो,
नकामयाबिया भी दो,
बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-61985120619071644342007-06-18T09:17:00.001-07:002007-06-19T04:18:06.898-07:00काश ऐसा होसुन सान बगर हो,
दुर टिकी नजर हो,
आखो मे आशा हो,
जिन्दगी मानो तराशा हो, काश: ऐसा हो । कोइ अपने पास हो,
महकति आभाष हो,
कानो मे बात हो,
अपनो कि बर्ताब हो, काश: ऐसा हो । निरव सुन्यता हो,
शान्ति और सौन्दर्य हो,
दिल मे सुकुन हो,
मुस्कान कि आभा हो, काश: ऐसा हो।
काश: ....................काश: ऐसा हो ।बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-19152025268011429212007-06-18T06:38:00.001-07:002007-06-18T06:38:16.690-07:00शुक्रियाचोटों पे चोट देते ही जाने का शुक्रियापत्थर को बुत की शक्ल में लाने का शुक्रिया जागा रहा तो मैंने नए काम कर लिएऐ नींद आज तेरे न आने का शुक्रिया सूखा पुराना जख्म नए को जगह मिलीस्वागत नए का और पुराने का शुक्रिया आती न तुम तो क्यों मैं बनाता ये सीढ़ियाँदीवारों, मेरी राह में आने का शुक्रिया आँसू-सा माँ की गोद में आकर सिमट गयानजरों से अपनी मुझको गिराने का शुक्रिया अब यह हुआ कि दुनिया ही बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-48685645360488299862007-06-18T05:28:00.000-07:002007-06-18T05:35:01.491-07:00दिल ने जिसे चाहा !वैसे गाना पुराना है । फिर भि बार बार याद आता है । सोचा आप को भि ब ता दु !:) ( :( ) ( एक गाना CURT COBAIN की तरफ से )
My girl, my girl, dont lie to meTell me, where did you sleep last night?
In the pines, in the pines
Where the sun dont ever shine
I would shiver the whole night through
My girl, my girl, where will you go?
Im going where the cold wind blows
In the pines, in the pines
Where the sunबोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.comtag:blogger.com,1999:blog-7845169987975672699.post-25565563975390999382007-06-14T08:26:00.000-07:002007-06-14T09:11:05.666-07:00लिखेङ्गे अबसे हम भिहा, अब से हम भि,
लिखेक्ङ्गे अपनि दिल कि बाते,
जो,
अपने मुह से कभी बोला नही,
कही किसिसे खोला नही,
हा, खुला पुस्तक बने, जो,
पढ सके अपनि दिल से,
कोइ सम्झ सके, तो....................बोगटी सरोजhttp://www.blogger.com/profile/07885196120027936275noreply@blogger.com