2007-07-04

धडकन तुम्हारि

केवल तुम्हारे खातिर्, बदनाम हुए हम्,
तनहाईया कि बारात मे गुमनाम हुए हम ।

छु-कर देखा था, कभि धडकन तुम्हारि,
दुनिया वालो मे से, गम कि पहचान हुए हम ।
आशिकी इस क़दर, छा गयी मुझ पर,
कि अपनो से भी, अनजान हुये हम ।
बस ! अब तो , याद बची है तुम्हारी,
आये कोई क्योँ यहा, शमशान हुए हम .


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2007-07-03

दे दो ना ........

वेवशी दर्द का आलम,
तुम मुझे दे दो अपनी गम,

खामोशिया भी दो,
तनहाईया भी दो,
बेचैनिया भी दो,
................................. दे दो ना ।

भीगी पल्को से चुरा लुंगी नमी,
रहने दूंगी ना कही कोई कमी,
तुम को दामन ना भी दोने दूंगी,
अब कभी ना तुम्हे रोने दूंगी,

उलझते गम कि परछाई ,
देदो तुम अपने तनहाई,
गुमनामिया भी दो,
नकामयाबिया भी दो,
बिरानिया भी दो,
......................... दे दो ना।

- मामुनी ( उड़ीसा )